
नई दिल्ली: आर्टिकल 30 धार्मिक माइनॉरिटी को अपने एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन बनाने और चलाने का अधिकार देता है। उत्तराखंड सरकार ने एक बिल पेश किया है जिसके तहत मदरसों के लिए सरकारी एजुकेशनल बोर्ड में रजिस्टर होना ज़रूरी किया जा रहा है। एजुकेशनल बोर्ड तय करेगा कि कौन सा धार्मिक कंटेंट पढ़ाया जा सकता है या नहीं। यह कानून संविधान में दी गई गारंटी और फंडामेंटल राइट्स का उल्लंघन है। मदरसों को मिली संवैधानिक ऑटोनॉमी को बचाना मुस्लिम समुदाय की ज़िम्मेदारी है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और अन्य ऑर्गनाइज़ेशन मदरसों के साथ खड़े हैं। इस मामले से जुड़े केस उत्तराखंड हाई कोर्ट में विचाराधीन हैं। अगर ज़रूरत पड़ी तो इस मामले को सुप्रीम कोर्ट भी ले जाया जाएगा। मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी और अन्य नेताओं ने मदरसों के समर्थन में बयान जारी किया है।।
दाऊद,अमन, की रिपोर्ट ✍️
