हम मुख्यमंत्री के काम तय नहीं कर सकते’, विजय को मुआवजा बांटने से रोकने वाली कांग्रेस की विपक्षी पार्टी DMK की याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज।

दाऊद खान की रिपोर्ट ✍🏻 

तमिलनाडु के करूर में हुए हादसे में 41 लोगों की मौत हो गई थी. यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था. डीएमके ने मौजूदा टीवीके सरकार (तमिलगा वेत्री कड़गम) के खिलाफ याचिका दाखिल की थी. मुख्यमंत्री विजय हादसे के पीड़ित परिवारों से मिलकर उन्हें मुआवजा और नौकरी देने वाले हैं, डीएमके का कहना था कि सीएम विजय को रोकना चाहिए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने डीएमके की याचिका को खारिज कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा* कि हम किसी भी मुख्यमंत्री की गतिविधियों को तय नहीं करेंगे. जजों ने डीएमके के वकील से कहा कि वह कोर्ट को राजनीतिक लड़ाई का मंच न बनाएं. अगर सत्ताधारी टीवीके के नेता हादसे को लेकर बयान दे रहे हैं, तो डीएमके भी उसके जवाब में बयान दे सकती है. यह लड़ाई कोर्ट के बाहर लड़ी जानी चाहिए।

पीड़ितों को 10-10 लाख रुपए और नौकरी देने वाले हैं विजय* : डीएमके ने याचिका दाखिल कर कहा था कि पिछले साल टीवीके की रैली में हुए हादसे की जांच को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है. मुख्यमंत्री विजय 41 लोगों की मौत वाले इस हादसे के पीड़ितों को 10-10 लाख रुपए मुआवजा और सरकारी नौकरी देने के लिए करूर जाने वाले हैं. डीएमके ने इसी का विरोध किया था।

क्या है पूरा मामला ? गौरतलब है कि पिछले साल सितंबर में टीवीके की करूर में एक रैली थी, जिसमें भगदड़ मच गई थी. इस दौरान 41 लोगों की जान चली गई थी. इस घटना की जांच मद्रास हाई कोर्ट ने विशेष जांच दल को सौंपी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच राज्य पुलिस से लेकर सीबीआई के हाथों में दे दी थी. अहम बात यह भी है कि जांच की निगरानी कोर्ट एक कमेटी भी कर रही है. मुख्यमंत्री विजय पीड़ित परिवारों से मिलने वाले हैं।

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